मीरा ने कहा, "यह कोड है। हमें सही दरवाज़ा चुनना होगा।"
अगले ही पल, दादी प्रकट हुईं। वह बोलीं, "शान, यह सूचकांक कोई नक्शा नहीं है। यह उन सब यात्राओं की डायरी है, जो इस द्वीप पर आईं। मैं यहाँ फँसी थी क्योंकि मैं केवल खजाना ढूंढ़ना चाहती थी। तुमने बलिदान चुना, इसलिए तुमने मुझे मुक्त कर दिया।"
एक रात, वे एक पुराने सबमरीन जहाज़ से रवाना हुए। तूफान के बाद, वे एक ऐसे द्वीप पर पहुँचे, जहाँ के पेड़ बहुत ऊँचे थे, जानवर छोटे थे, और ज्वालामुखी धुआँ उगल रहा था।
शान ने आवाज़ सुनी—अपनी दादी की। वह तीसरे दरवाज़े से आ रही थी। उसने बिना डरे, किवाड़ खोला। अंदर एक चमकता हुआ हीरा नहीं, बल्कि एक पुराना पन्ना (Index Page) था, जिस पर लिखा था: index of journey 2 the mysterious island hindi
सच्ची यात्रा द्वीप तक नहीं, बल्कि अपने अंदर के सूचकांक तक होती है।
लेकिन शान ने सोचा, "जर्नी 2: द मिस्टीरियस आइलैंड" फिल्म की तरह, असली खतरा सिर्फ द्वीप नहीं, बल्कि उसके भीतर छिपा 'सूचकांक' था। उसने चुपके से अपने दोस्तों—बुद्धिमान मीरा और तकनीकी विशेषज्ञ अर्जुन—को बुलाया।
शान ने अपने सौतेले पिता हैंक (Hank) को बताया। हैंक, जो एक पूर्व नौसेना अधिकारी थे, ने उड़ान भरने से मना कर दिया। "बेटा, यह असंभव है," उन्होंने कहा। मीरा ने कहा
"जो इस द्वीप को ढूंढे, वह अपना भविष्य पाए। जो इसका सूचकांक पढ़े, वह अपना अतीत सुधारे।"
पुरानी किताबों की धूल भरी दुकान में, शान (Sean) को एक अजीब रेडियो सिग्नल मिला। वह हिंदी में था: "सहायता करें... द्वीप... सूचकांक..." यह कोई साधारण संदेश नहीं था। यह उसकी दादी की आवाज़ थी, जो तीन साल पहले एक अभियान में गायब हो गई थीं।
अंत में, पूरा द्वीप काँपा। वे सब जहाज़ पर सवार हुए और वापस लौट आए। शान ने उस पन्ने को घर के कमरे में लगा दिया। अब हर बार जब वह उसे देखता, उसे याद आता— जानवर छोटे थे
वहाँ उन्हें एक गुफा मिली। गुफा के दरवाज़े पर हिंदी में लिखा था: "सूचकांक केवल सत्य के यात्री को मिलेगा।"
अंदर, तीन किवाड़ थे। पहले पर लिखा था "भय", दूसरे पर "लालच", तीसरे पर "बलिदान"।