शत्रुंजय की शिखरों पर, बोले जिनवाणी के स्वर, पाँच चैत्य की वंदना में, बसते हैं भक्ति के घर।
जय पालीताना, जय शत्रुंजय, जय जिनवर का अटल विलास, पाँचों के स्पर्श से मिटता, भव-भ्रमण का हर दोष और त्रास। यह रचना पालीताना की पाँच मुख्य चैत्यवंदना (आदीश्वर, शांतिनाथ, कुंथुनाथ, अरहनाथ, मल्लिनाथ भगवान) की भावना को समर्पित है। palitana 5 chaityavandan in hindi
पाँच चैत्यवंदना का यह मंत्र, ध्वजा-दंड, अष्टापद का मान, पालीताना की सौरभ-सी, हर जैन के हृदय में प्राण। शत्रुंजय की शिखरों पर
पाँचवीं मल्लिनाथ को माथा, जिनके पद-कमल हैं सुखदायक, जिन भगवानों के दर्शन मात्र, हर लेते जन्म-जन्म के क्लेश अघायक। बोले जिनवाणी के स्वर
यह रहा पालीताना की पाँच चैत्यवंदना पर एक सरल एवं भावपूर्ण रचना (टुकड़ा / पीस):
तीसरी वंदना कुंथुनाथ की, ज्ञानी, तपस्वी, योगीराज, चौथी अरहनाथ की लीला, जिनके गुणों का बेड़ा आज।
पहली वंदना आदीश्वर की, जिनके चरणों में सारा नर-नार, दूजी वंदना शांतिनाथ की, जिनकी छवि हो अति मनोहार।