The Pursuit Of Happyness Movie In Hindi Guide

सैन फ्रांसिस्को, 1981। ये कहानी है क्रिस गार्डनर नाम के एक आम आदमी की। क्रिस एक सेल्समैन है। वो 'बोन डेंसिटी स्कैनर' नाम की एक मशीन बेचता है – जो एक्स-रे से थोड़ी बेहतर तो है, लेकिन डॉक्टर्स के लिए बेकार है क्योंकि ये बहुत महंगी है।

आखिरी दिन – ट्रेनिंग खत्म होती है। 20 में से 19 को निकाल दिया जाएगा। एक को नौकरी मिलेगी।

वो टॉयलेट के दरवाजे पर पैर रखकर रोकता है कि कोई अंदर न आए। सी.जे. उसकी गोद में सोता है। क्रिस अपने आंसू पोछता है और खुद से कहता है – "मैं रोने वाला नहीं हूँ। बस।"

क्रिस को बिग बॉस के कमरे में बुलाया जाता है। बॉस कहते हैं, "क्रिस, तुम्हारी शर्ट अच्छी है। कल भी पहन कर आना।" क्रिस सोचता है, "मतलब? कल भी? यानी... मुझे job मिल गई?" The Pursuit Of Happyness Movie In Hindi

क्रिस की आँखों से पानी बह निकलता है। वो अपने बेटे को कस कर पकड़ लेता है। उसे लगता है कि अब वो डूब रहा है, लेकिन वो बच्चे के लिए तैरता रहेगा।

अब क्रिस अकेला है, अपने 5 साल के बेटे के साथ।

क्रिस और सी.जे. अब सड़कों पर हैं। वे मोटल का किराया नहीं दे पाते। सामान बाहर फेंक दिया जाता है। क्रिस अपने बेटे को गोद में उठाकर BART स्टेशन के टॉयलेट में रात बिताने को मजबूर होता है। यानी

एक दिन, क्रिस शहर के सबसे अमीर इलाके में एक आदमी को फेरारी से उतरते हुए देखता है। क्रिस पूछता है, "सर, आपको ये नौकरी कैसे मिली?" वो आदमी जवाब देता है, "स्टॉकब्रोकर बनो। गणित आनी चाहिए और ईमानदारी होनी चाहिए। बस।"

उसे इंटर्नशिप मिल जाती है। लेकिन बिना पैसे के।

एक दिन, मैनेजर "जे ट्विस्टल" उससे मिलता है। वही पल – क्रिस रूबिक क्यूब (वो पहेली वाला गोला) का हल निकालता है जो ट्विस्टल खुद नहीं सुलझा पाया था। ट्विस्टल हैरान हो जाता है और उसे इंटरव्यू का मौका देता है। पेंटिंग के कपड़ों में

छह महीने बीत जाते हैं। क्रिस हर दिन फोन पर क्लाइंट्स को कॉल करता है, अपनी स्कैनर बेचता है, शेल्टर में रात करता है, और कभी हार नहीं मानता। वो अपनी सूट की जेब में सिर्फ एक कपड़ा रखता है ताकि ऑफिस के वॉशरूम में कपड़े धो सके।

उसकी आँखें नम हो जाती हैं। वो बॉस से हाथ मिलाता है, मुस्कुराता है, और ऑफिस से बाहर निकलता है।

वो दौड़ता हुआ डे-केयर सेंटर पहुँचता है। सी.जे. को गोद में उठाता है और कस कर गले लगाता है।

बाहर, सड़क पर भीड़ है। क्रिस अपने हाथ जेब में डाल कर चल रहा है। अचानक वो रुकता है और खुद से जोर से ताली बजाने लगता है – बिना किसी वजह के, बस इसलिए कि उसने वो कर दिखाया जो नामुमकिन लगता था।

लेकिन मुसीबत – एक रात पुलिस क्रिस को गिरफ्तार कर लेती है क्योंकि उसके पास पार्किंग के जुर्माने भरने के पैसे नहीं थे। अगले दिन उसका इंटरव्यू है! वह पुलिस स्टेशन से सीधे, पेंटिंग के कपड़ों में, दौड़ता हुआ ऑफिस पहुँचता है।

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